महाराज के पंचायत प्रमुखों के प्रत्यक्ष चुनाव कराने का अन्य प्रदेश के मंत्रियों ने किया स्वागत

17HREG299 महाराज के पंचायत प्रमुखों के प्रत्यक्ष चुनाव कराने का अन्य प्रदेश के मंत्रियों ने किया स्वागत

-उत्तराखंड में 1102 अमृत सरोवरों का निर्माण : पंचायतीराज मंत्री

-मोटे अनाजों के प्रयोग से चारधाम प्रसाद हो रहा तैयार

देहरादून, 17 अप्रैल (हि.स.)। पंचायतों को सशक्त करने के लिए पंचायत प्रमुख के प्रत्यक्ष चुनावों की संभावनाओं को भी धरातल पर उतारना होगा। उत्तराखंड के लिए निर्धारित 975 अमृत सरोवरों के सापेक्ष 1102 अमृत सरोवरों का निर्माण किया गया है। स्थानीय मोटे अनाजों से चारधाम प्रसाद तैयार किया जा रहा है।

सोमवार को नई दिल्ली के प्लेनरी हॉल, विज्ञान भवन में पंचायतों के प्रोत्साहन संबंधी राष्ट्रीय सम्मेलन-सह पुरस्कार समारोह को पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने संबोधित करते हुए यह बातें कहीं। इस मौके पर महाराज ने केंद्रीय पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह को जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत प्रमुखों के प्रत्यक्ष चुनाव कराने से संबंधित एक पत्र भी सौंपा। बिहार के पंचायती राज मंत्री मुरारी गौतम सहित अन्य राज्यों के मंत्रियों ने भी महाराज की बात का स्वागत करते हुए पंचायत प्रमुखों के प्रत्यक्ष चुनाव कराए जाने का समर्थन किया।

पंचायत मंत्री महाराज ने कहा कि जिन पंचायत प्रतिनिधियों ने इस वर्ष विभिन्न थीमैटिक क्षेत्रों में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किये हैं, निश्चित रूप से वह सभी पंचायतों को मजबूत करने और उनको सशक्त करने की दिशा में अपने कर्तव्यों का निर्वाहन करेंगे।

सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों की विशेष भूमिका है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतें विकास की धुरी है। सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण और स्थानीय चुनौतियों का यथोचित समाधान तलाशने के लिए त्रिस्तरीय पंचायतों को सशक्त करना अत्यन्त आवश्यक है। हमारी सरकार पंचायतीराज संस्थाओं के सशक्तिकरण के लिए कटिबद्ध है।

राज्य में पंचायतों के सहयोग से 56200 महिला समूह सक्रिय रूप से कार्यरत है, जिसमें लगभग 422000 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। वर्तमान में लगभग 37000 महिलाएं ‘लखपति दीदी है, जिनकी वार्षिक आमदनी एक लाख से अधिक है। वर्ष 2025 तक 150000 से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी बनाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

करीब 1,50,000 महिलाएं कृषि एवं सहसम्बन्धी गतिविधियों के माध्यम से स्वयं की आजीविका समृद्ध करने के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था में भी योगदान दे रहीं है। राज्य में स्थानीय एवं जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए तथा स्वस्थ ग्राम थीम की प्राप्ति के लिए स्थानीय मोटे अनाजों का प्रयोग कर नैनो पैकेजिंग इकाइयों के माध्यम से चारधाम प्रसाद तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि “स्वच्छ और हरित गांव थीम को प्राप्त करने के लिए पंचायतीराज विभाग की ओर से “उत्तराखंड पंचायतों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन नीति, 2017″ के तहत,ग्राम मुजाहिदपुर सतीवाला खालसा, विकास खण्ड भगवानपुर जनपद हरिद्वार में प्लास्टिक वेस्ट रिसाइक्लिंग प्लांट” का निर्माण किया गया है। कन्वर्जेस मॉडल अपनाते हुए राज्य के 95 विकास खण्डों में स्थापित कॉम्पेक्टर के माध्यम से पंचायतें प्लास्टिक संकुचित गांठें को रिसाइकिलिंग प्लॉन्ट में पुनः चक्रण के माध्यम से अपशिष्ट निस्तारण के साथ-साथ आजीविका संवर्धन भी कर रही हैं।

उन्होंने पर्याप्त जल युक्त गांव की थीम का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड राज्य स्वच्छ जल का एक महत्वपूर्ण भण्डार है, किन्तु पर्यावरणीय बदलावों का असर राज्य के जल स्रोतों पर भी पड़ रहा है। जल स्रोतों को रिचार्ज करने के लिए पारम्परिक रूप में चाल-खाल बनाकर पानी को संग्रहित किये जाने की आवश्यकता है।

जंगलों में भी वर्षा जल संग्रहण के लिए चाल-खाल बनाये जाने की आवश्यकता है, जो न सिर्फ जंगल में नमी बनाए रखने में मददगार होंगे, वरण मनुष्यों और जानवरों के पीने के पानी की कमी भी पूर्ण करेंगे। राज्य में जल शक्ति अभियान-कैच द रेन का संचालन किया जा रहा है। उक्त सभी कार्य पंचायतीराज संस्थाओं के नेतृत्व में किये जा रहे हैं।

पंचायतों के नेतृत्व में प्रदेश के निर्धारित 975 अमृत सरोवरों के सापेक्ष 1102 अमृत सरोवरों का निर्माण किया गया है। इन अमृत सरोवरों से जहां एक ओर गांव में जल की पर्याप्तता सुनिश्चित रहेगी वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवेश को हरित बनाने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

उत्तराखंड राज्य में प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन और संरक्षण की समृद्ध लोक परम्परा रही है, जिनमें चिपको आंदोलन, पाणी राखो आंदोलन, मैती आन्दोलन एवं हरेला, फूल देई जैसे लोक पर्व मुख्य हैं। इन पर्वों में पंचायतों के माध्यम से विशेष पौधरोपण अभियान चलाए जाते हैं। सुशासन युक्त गांवों की दिशा में राज्य की पंचायतों की ओर से नागरिकों को लगभग 42 आवश्यक सेवाओं को ऑनलाइन-ऑफ़लाइन माध्यम से प्रदान करने के लिए योगदान किया जा रहा है।

हिमालयी राज्यों के प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने केंद्रीय पंचायती राज मंत्री से अनुरोध किया कि हिमालयी राज्यों की ग्राम पंचायतों के भौगोलिक परिदृश्य, जटिल परिस्थितियों एवं चुनौतियों के दृष्टिगत आगामी वर्ष से हिमालयी राज्यों के लिए पुरस्कारों की पृथक श्रेणी के सम्बन्ध में विचार किया जाये।

इस मौके पर पंचायती राज विभाग,उत्तराखंड के अपर निदेशक मनोज कुमार तिवारी, एडीओ पंचायत सुनील कोटनाला, ललित सैनी, कलम सिंह राणा, ललित कुमार आदि मौजूद थे।