लखनऊ में फरवरी में एक बार फिर होगा साहित्यकारों और लेखकों का जमावड़ा

28HREG322 लखनऊ में फरवरी में एक बार फिर होगा साहित्यकारों और लेखकों का जमावड़ा

मंथन फाउंडेशन की ओर से 11 व 12 फरवरी को होगा कलामंथन – मंथन साहित्य उत्सव

लखनऊ, 28 जनवरी ( हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ कविताओं और मुशायरों का शहर तो रहा ही है, लेकिन अब गम्भीर विषयों को लेकर बड़े साहित्यिक कार्यक्रमों का भी शहर हो गया है। अभी पिछले नवम्बर को कथाक्रम साहित्यिक समारोह, दिसम्बर में लिट्लेचर फेस्टिवेल हुआ। इसके अलावा गोष्ठियां और पुस्तक लोकार्पण होते ही रहते हैं। उ.प्र. हिन्दी संस्थान में भी गोष्ठियां व साहित्यकार स्मृति होते रहते हैं। इसी क्रम में आगामी फरवरी माह की 11 और 12 तारीख को कलामंथन – मंथन साहित्य उत्सव का चैथा सस्करण इस साल इसी शहर में होगा।

दिल्ली की रहने वाली मंथन फाउंडेशन की संस्थापिका सरिता निर्झरा, जो स्वयं भी लेखिका है, ने बताया कि चार वर्ष पूर्व देश की राजधानी दिल्ली में मंथन फाउंडेशन ने प्रथम साहित्य उत्सव आयोजन किया था। पिछले दो वर्षों में कोविड-19 महामारी की वजह से यह उत्सव ऑनलाइन आयोजित किए गए थे। जहां देश के गणमान्य साहित्यकारों व अन्य कलाकारों ने भाग लिया था।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष मंथन फाउंडेशन का यह आयोजन लखनऊ शहर में गोमती नगर के प्रसिद्ध शिरोज कैफे में आयोजित होगा। यह कैफे एसिड अटैक से पीड़ित महिलाओं के लिए विशेषतः कार्यरत है। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में प्रदेश और प्रदेश के बाहर से साहित्यकारों का जमावड़ा होगा। इसमें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित ऋषिकेश सुलभ , साहित्यकार गीताश्री, जयंती रंगनाथन, उर्मिला शिरीश, विनीता अस्थाना, सत्य व्यास, रजनी गुप्त , शैलेंद्र सागर, सुशीला पुरी, जैसे बहुचर्चित नाम और साहित्य जगत की जानी मानी शख्सियतें शामिल होंगी।

निर्झरा ने बताया कि इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवियत्री रश्मि भारद्वाज और जोशना आडवाणी की उपस्थिति एवम काव्य पाठ होगा। बताया कि सबसे बड़े हिन्दी भाषी प्रदेश में हिन्दी साहित्य पर सतत सार्थक कार्य होना जरूरी है जहां गंभीर विमर्श उत्सव का हिस्सा बन सके।