उत्तराखंड विस मानसून सत्र में उठा स्मार्ट सिटी का मुद्दा

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देहरादून, 08 सितंबर (हि.स.)। उत्तराखंड विधानसभा मानसून सत्र के चौथे दिन शुक्रवार को स्मार्ट सिटी के निर्माण कार्यों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। इस दौरान विपक्ष और संसदीय कार्य मंत्री के बीच सदन में तीखी नोक-झोंक हुई।

शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान सदन में स्मार्ट सिटी का मुद्दा उठा। कांग्रेस के चकराता विधायक प्रीतम सिंह ने पूछा कि स्मार्ट सिटी में कितनी कार्यदायी संस्था कार्य कर रही हैं और कितना खर्च हुआ है। शहरी विकास मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल ने बताया कि 1000 हजार करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। राज्य और केंद्र सरकार दोनों आधा-आधा राशि देंगी। कुल 14 संस्थाएं कार्य कर रही हैं। केन्द्र से 394.50 करोड़ रुपये आ चुके हैं जबकि राज्य से 241.09 दिया गया है। कुल 635 करोड़ 59 लाख खर्च हुआ है। स्मार्ट सिटी का कार्य 70 फीसदी पूरा कर लिया गया है। स्मार्ट सिटी के 22 काम में 16 काम पूरे कर लिए गए हैं।

प्रीतम सिंह और मंत्री के बीच संसदीय परम्परा को लेकर बहस भी हुई। जिस पर विधनसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने कहा कि 03 प्रश्न पूछने की परंपरा है उसके बावजूद भी मौका दिया गया।

विधायक मनोज तिवारी के आपदा और पुनर्वास प्रश्न पर संसदीय कार्य मंत्री प्रेम चंद ने बताया कि 45650 परिवरों को 30 करोड़ 39 लाख की धन राशि वितरित की गई है। उपनेता भुवन कापड़ी ने प्रश्न पर उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में पुनर्वास की एक नीति बनाई गई है। व्यवस्था के तहत खानपुर विधायक ने पत्रकारों के साथ धक्का मुक्की करने का विषय उठाया।

पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने काजी हाउस के संचालन पर कहा कि गोशाला और काजी हाउस के लिए एक-एक स्थापना के लिए आदेश दिए गए हैं। गोवंश के भरण पोषण के लिए अनुदान दिया जाता है।

हरिद्वार ग्रमीण विधायक अनुपमा रावत के तारांकित प्रश्न में बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से किसानों के हुए नुकसान के मुआवजे को लेकर सवाल पूछा। जिस पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि कई जिलों में बेमौसमी बारिश से नुकसान नहीं हुआ है। जिस पर विपक्ष के विधायक ने नाराजगी जताई और खड़े होकर विरोध किया। मंत्री ने बताया कि हरिद्वार में 834.7371 हेक्टेयर क्षेत्रफल में नुकसान हुआ है। फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए 7136 किसानों को मानकों के अनुसार 01 करोड़ 71 लाख 12 हजार से अधिक मुआवजा वितरण किया गया है।

सौरभ बहुगुणा ने विधायक ममता राकेश के प्रश्न पर कहा कि शुगर वेज बोर्ड का लाभ दिया जा रहा है। विभाग में कोई इंस्पेक्टर राज नहीं है। राज्य में जल्द ही एथनॉल नीति लाई जाएगी। क्रेशर इकाइयों से गन्ना की पेराई किया जाता है। लगभग 400 से 450 पावर कोल्हू भी कार्यरत हैं। जिससे गुड़ और शक्कर का उत्पादन किया जाता है।

इससे पहले कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा के बाहर कानून व्यवस्था को लेकर धरना दिया। इस दौरान उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी का कहना था कि प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था ठप हो चुकी है। डेंगू से प्रदेश बेहाल है। बेरोजगार सड़कों पर घूम रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। कानून व्यवस्था केवल चालान काटने और उगाई के लिए कम कर रही है। यह तमाम मुद्दे हैं जो सदन के अंदर हम उठा रहे हैं लेकिन कहीं भी हमें संतोषजनक जवाब सत्ता पक्ष से नहीं मिल रहा है।