राजगढ़ः शिव कथा संपूर्ण विश्व का कल्याण करने वाली है : पं.प्रदीप मिश्रा

19HREG358 राजगढ़ः शिव कथा संपूर्ण विश्व का कल्याण करने वाली है : पं.प्रदीप मिश्रा

राजगढ़, 19 अगस्त (हि.स.)। भगवान शिव की कथा सुनने मात्र से मनुष्य के रोग, दुख, कष्ट, दरिद्रता समेत हर तरह की व्याधियां कट जाती है, शिवमहारपुराण संपूर्ण विश्व का कल्याण करने वाली कथा है। भगवान शिव की पूजा-अर्चना, उपासना और जल का आचमन करने से मनुष्य समस्त बंधनों से मुक्त हो जाता है साथ ही मोक्ष को प्राप्त होता है। यह वाचन श्रावण मास के पावन पर्व पर शनिवार को राजगढ़ जिला मुख्यालय स्थित कथास्थल पर समस्त ब्रहमांण को अलोकित करने वाले त्रिपुरारी महादेव के तेजस्विता के वैभवगान पर आधारित तेज शिवमहापुराण कथा के प्रथम दिवस पर अंतर्राष्ट्रीय कथा प्रवक्ता पं. प्रदीप मिश्रा ने किया।

मां जालपा की गोद, पवित्र नेवज नदी के तट पर कथाप्रवक्ता पं. श्री मिश्रा ने राजगढ़ जिले की प्रशंसा करते हुए कि यहां का भोजन और पहनावा मध्यप्रदेश क्या, पूरे भारत में प्रसिद्ध है। उन्होंने मां जालपा देवी की स्थापना के इतिहास के बारे में बखान करते हुए कहा कि अति जलवृष्टि से परेशान भील समाज के सरदार ने अष्टभुजा मां की आराधना की तभी प्रसन्न होकर देवी मां जल में तैरती हुई आई, जिन्हें मछुवारे के जाल से नदी में से निकाला गया और विशाल टेकरी पर मां की प्रतिमा को विराजित किया गया। भगवान शिव की आरधाना, पूजा-अर्चना, एक लोटा जल और व्रत सहित अन्य बताए गए उपाय करने से जिन श्रद्वालुओं को लाभ मिला, उनका व्यासपीठ से नाम पुकारा गया, जिन्होंने भगवान शिव की कृपा को दिल से माना।

पं. प्रदीप मिश्रा ने तेज शिवमहापुराण कथा के दौरान देवराज नामक ब्राहमण के चरित्र को सुनाया, जो चोरी, शराब सहित अन्य व्यसन करता था, जिसके चलते वह पाप का भागी हो गया था लेकिन शिव कथा का श्रवण करने और बिल्वपत्र के पेड़ के नीचे मृत्यु होने से भगवान शिव का वरदान प्राप्त हुआ और वह कैलाशबासी हो गया। कथा के दौरान मां अंजना और केशरीनंदन के चरित्र का बखान किया गया। इस मौके पर बड़ी तादाद में मौजूद भक्तगणों ने श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र का जाप कर पुण्यलाभ प्राप्त किया। कथा के मुख्य यजमान पूर्व विधायक पं.हरीचरण तिवारी, श्यामचरण तिवारी, रमाकांत तिवारी, आशीष तिवारी, अभिषेक तिवारी सहित समस्त राजगढ़ क्षेत्रवासी भगवान शिव के भक्तगणों को सेवाएं देने के लिए तत्पर रहे।