19HREG100 अनूपपुर: पति की लम्बी आयु कामना लिए महिलाओं ने वट वृक्ष के 108 फेरे लगाकर पूजन किया
बरगद के तनों में अक्षय सूत्र बांध सुख-समृद्धि की कामना
अनूपपुर, 19 मई (हि.स.)। वट सावित्रि व्रत में वट यानि बरगद के वृक्ष के साथ-साथ सत्यवान-सावित्री और यमराज की पूजा की जाती है। माना जाता है कि वटवृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों ईष्टदेवों का वास होता है। वट वृक्ष के समक्ष बैठकर पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आज शुक्रवार को शनि देव का जन्मोत्सव और वट सावित्री पूजा के अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लम्बी आयु और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए वट सावित्री का पावन व्रत किया। सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्षों की पूजा अर्चना कर सत्यवान-सावित्री कथा के प्रसंग में पति की लम्बी आयु की कामना लिए ईष्टदेव से सदा सुहागन का आशीष मांगा।
शुक्रवार की सुबह से ही महिलाओं ने निर्जला व्रत करते हुए नगर के मुख्य बरगद वृक्षों के तनों में अक्षय सूत्र के 108 परिक्रमा लगाते हुए कामना के सूत्र बांधे। इस विधि में हर फेरे में महिलाओं ने अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए ईष्टदेव से आशीर्वाद मांगा। महिलाओं ने बरगद के जड़ों में फल-फूल चढ़ाकर हवन-धूप किया। मान्यता है कि इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य, उन्नति और संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। ज्योतिष गणना के अनुसार इस वर्ष यह पर्व आज शुक्रवार को कृतिका नक्षत्र और शोभन योग में पड़ा है, जो ज्योतिषीय गणना के अनुसार उत्तम योग माना गया है। ज्येष्ठ अमावस्या तिथि का प्रारंभ 18 मई दिन गुरुवार को रात्रि 9 बजकर 03 मिनट पर हुआ है जो 19 मई को रात्रि 8 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। जिला मुख्यालय अनूपपुर सहित पसान, कोतमा, जैतहरी, बिजुरी, अमरकंटक,चचाई, राजनगर एवं ग्रमीण क्षेत्रों में भी वट सावित्री व्रत और शनि देव के जन्मोत्साव के मौके पर सुबह से ही सुहागिन महिलाओं ने मंदिरों एंव वृक्षों की परिक्रमा के साथ पूजा पाठ किया गया। वट वृक्ष, तुलसी सहित अन्य दूसरे वृक्षों में भी 108 फेरी लगाने के बाद मंदिर में पूजा अर्चना की गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूजा करने का उद्देश्य पति की लम्बी आयु के साथ परिवारिक समृद्धि की कामना होती है।