दतिया: बसपा, फिर भाजपा, अब कांग्रेस के हुए पूर्व विधायक वघेल

06HREG328 दतिया: बसपा, फिर भाजपा, अब कांग्रेस के हुए पूर्व विधायक वघेल

इंदरगढ़, 06 मई (हि.स.)। मध्यप्रदेश में मिशन – 2023 की तैयारी को लेकर सत्ताधारी बीजेपी और विपक्षी पार्टी आगामी विधान सभा चुनावों की तैयारी में लग गयीं है । चुनावी साल में पार्टी एवं पदाधिकारियों से नाराज नेताओं का पार्टी से अलग होने का पुराना सिलसिला भी शुरू हो गया ।

पूर्व विधायक राधेलाल वघेल ने अपनी राजनीति की शुरूआत बहुजन समाज पार्टी से की थी । वे -2008 में दतिया जिले की सेंवढा विधानसभा 2022 से बसपा के टिकिट पर चुनाव जीते थे । वह दूसरी वार वर्ष -2013 में भाजपा के प्रदीप अग्रवाल से चुनाव हारने के कुछ समय वाद भाजपा में शामिल हो गये । बसपा छोड भाजपा में वघेल को भाजपा ने पिछडा वर्ग आयोग जैसा महत्वपूर्ण पद ही नहीं दिया, बल्कि 2018 में सेंवढा विधानसभा से सिटिंग विधायक प्रदीप अग्रवाल का टिकिट काटकर राधेलाल वघेल को अपना उम्मीदवार वनाया, परन्तु वर्षों से भाजपा के टिकिट का इंतजार कर रहे पुराने नेताओं के बगावती तेवरों तथा कॉग्रेस के घनश्याम सिंह से चुनाव हार गये थे । शनिवार को बघेल के कॉग्रेस में शामिल होने के दौरान सेंवढा विधायक घनश्याम सिंह साथ थे, जहॉ कॉग्रेस नेताओं की मौजूदगी में प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने उन्हें सदस्यता दिलाई ।

अब कयास लगाये जा रहे है कि बीजेपी नेताओं के कॉग्रेस में शामिल होने से वर्ष -2023 के चुनावों में मुश्किलों का सामना करना पड सकता है । वहीं कॉग्रेस को चुनावी टक्कर देने में मदद मिल सकती है।

विदित हो कि वर्ष 2022 में अपने जनसम्पर्क के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अमर्यादित टिप्पणी का वीडियो वायरल होने के चलते राधेलाल वघेल को भाजपा से निष्कासित कर दिया था । अपने निष्कासन के बाद वघेल भी पार्टी में अपने आप को उपेक्षित ही महसूस नहीं कर रहे थे, बल्कि नाराजी के चलते वह कॉग्रेस नेताओं से सम्पर्क कर अपना भविष्य टटोल रहे थे । परिणामत: उन्होंने कॉग्रेस में अपना भविष्य भी सुरक्षित समझते हुये पार्टी की सदस्यता ले ली । यदि पार्टिया अंचल में लोकप्रिय उम्मीदवार को छोड़कर नये चेहरे पर दाव लगाती है तो फिलहाल सेंवढा विधान सभा क्षेत्र में कुछ वदलाव तो हो सकता है ।