16HREG183 ऋषिकेश में हुआ गंगा समग्र अभियान का सम्मेलन
गंगा को मोक्षदायनी माने जाने के कारण ही गंगा में अस्थि विसर्जन का भी महत्व है : रामाशीष
-गंगा को बचाए जाने के लिए जन जागरण अत्यंत आवश्यक है
ऋषिकेश,16 अप्रैल (हि.स.)। गंगा समग्र अभियान के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामाशीष ने कहा कि मां गंगा को बचाने के लिए सामूहिक सहयोग और जन जागरण की आवश्यकता है ,क्योंकि भारतीय संस्कृति और जीवन में गंगा का विशेष स्थान है। जो मोक्ष जीवनदायिनी भी है। इसीलिए गंगा में अस्थि विसर्जन को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
यह बात रामाशीष ने परमार्थ निकेतन में रविवार को गंगा समग्र अभियान के दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गंगा को मां का दर्जा दिया गया है, क्योंकि इसे मोक्ष दायनी और जीवन दायिनी के रूप में जाना जाता है। जिसने दुनिया में भारतीय राष्ट्रीय और संस्कृति की पहचान दी है। यह हर भारतवंशी के जीवन में रची बसी है। गंगा की घाटी दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाली नदी घाटी मानी जाती है,भारत देश की कुल आबादी का लगभग आधा भाग इससे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पोषित है, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि गंगा जी आज विश्व की 10 सबसे अधिक प्रदूषित नदियों में शामिल हो गई है।
उन्होंने कहा कि इसके कारण आम आदमी का दम घुट रहा है। गंगा की इस दशा के साथ गंगा का अस्तित्व खत्म होने की स्थिति पैदा हो गई है। इसी चिंता को लेकर गंगा समग्र संस्था का उदय हुआ है, जिसने देश के हर कोने में अविरल और निर्मल बनाने का संकल्प लिया है। गंगा समग्र संस्था गंगा किनारे पौधों का रोपण किया जाना, गंगा के प्रति लोगों को जागरूक करने, छोटी-छोटी गोष्ठी करना, दुर्गा वाहिनी में नव युवकों को जोड़ना, गंगा सेविका समिति से महिलाओं को जोड़कर धार्मिक आयोजन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में गंगा किनारे पौधरोपण किया जाना अत्यंत आवश्यक है। यह पर्यावरण की दृष्टि से आवश्यक है।
इस अवसर पर गंगा समग्र गंगा निर्मल गंगा कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन मंत्री प्रांत संगठन मंत्री गंगा समग्र निरंजन त्रिवेदी और राष्ट्रीय महामंत्री आशीष भैया दिव्य सेवा मिशन के संचालक, ने किया इस दौरान कार्यक्रम के संयोजक अरुण घिडियाल, क्षेत्रीय विधायक रेणु बिष्ट, ऋषिकेश जिला सह संयोजक राजीव गुप्ता सहित काफी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।