15HREG307 रतलाम: बेटी को शिक्षित बनाओंगे तो उसे न्याय-अन्याय का पता चलेगा : जयाकिशोरी
रतलाम, 15 अप्रैल (हि.स.)। कठिन परिस्थितियां आती है उसे टाला नही जाता, क्योंकि वो तो कर्मो का फल है। या तो अभी के कर्म या पिछले जन्म के कर्म है। दिक्कतें सबको दिखती है, भगवान ने क्या किया ये नही दिया, वो नही दिया थोड़ा समय निकल कर उस पर भी सोच लीजिये की भगवान ने आपको क्या क्या दिया? ये दिक्कते अपने आप कम हो जाएगी। कठिन परिस्थिति कुछ न कुछ सिखाने ही आती है। भगवान आपके लिए बहुत कुछ करते है, जब शांति से सोचोगे तों पता चलेगा की भगवान ने आपको क्या क्या दिया जो दिया उसके लिए भी धन्यवाद भी देदिया करो।
उक्त बात कनेरी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में जयाकिशोरी ने कही। उन्होंने कहा कि मनुष्य का स्वभाव ही ऐसा है जिसके साथ अधिक रहता है मोह हो जाता है, उससे प्रेम करने लगता है। यदि बच्चों को देना है तो अच्छी शिक्षा दीजिये ओर बेटों को नही बेटियों को भी,यह कौन बाप चाहेगा कि बेटी दुखी हो तो उसे आत्म निर्भर बनाइये। पहले बेटी पिता पर निर्भर रहती है फिर पति पर। शादी करना ही मा बाप का काम नही बच्चों को काबिल बनाये, जिससे आप के जाने के बाद भी वो अच्छे से अपना जीवन निकाल ले । बेटी को शिक्षित बनाये, शिक्षित नही तो न्याय-अन्याय पता कैसे चलेगा? जो शिक्षित नही होती उन्हे पता नही होता उनके साथ क्या हो रहा है। दुनिया संतुलन पर चलती है कोई भी ऐसा समय नही था जिसमे अच्छाई ही अच्छाई हो ओर कोई ऐसा भी ऐसा समय नही आया जिसमे बुराई ही बुराई हो इसलिए दुनिया संतुलन से चलती है।
उन्होंने कहा कि जो हमारे जीवन में साधारण हो वो किसी ओर के लिए कितना महत्वपूर्ण है। हमें नही पता कि किसके जीवन में क्या चल रहा है ? हम टिप्पणी करने लगते है। व्यक्ति को दूसरे की बजाय अपनी कमी निकालनी चाहिए। कथा में भक्त प्रहलाद का विस्तार से वर्णन किया गया। भागवत कथा में नर्मदानंद जी ने भी कहा कि बच्चों के जन्मदिन दिन पर केक काटने की बजाय एक पौधा लगाए, जिस प्रकार पौधा फैलता उसी प्रकार परिवार भी फैलेगा ।