12HREG300 (अपडेट)शिक्षकों को दूसरे वर्ष ही मिलने लगेगा शत-प्रतिशत वेतन, पूर्व सरकार का फैसला था गलत : शिवराज
– नव नियुक्त शिक्षकों को मिले नियुक्ति बधाई पत्र
भोपाल, 12 अप्रैल (हि.स.)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शिक्षकों के हित में महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए घोषणा की कि पूर्व सरकार ने शिक्षकों को पूर्ण वेतन देने के लिए कई साल प्रतीक्षा करने का आदेश निकाला था, जो गलत था। इसे बदलकर नए सिरे से लागू किया जाएगा। अब शिक्षकों को दूसरे वर्ष में ही वेतन की 100 प्रतिशत राशि प्राप्त होने लगेगी। प्रथम वर्ष 70 प्रतिशत राशि के बाद 100 प्रतिशत प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना होता था। अब यह प्रक्रिया एक वर्ष में पूर्ण हो जाएगी। इसके लिए शिक्षकों को 4 वर्ष की प्रतीक्षा नहीं करनी होगी।
मुख्यमंत्री चौहान बुधवार को मुख्यमंत्री निवास में नव-नियुक्त शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज का दिन अविस्मरणीय है। शिक्षक का सही नाम गुरू होता है। यहाँ मौजूद सभी शिक्षक गुरू हैं। गुरू वशिष्ठ और गुरू द्रोणाचार्य से लेकर अनेक ख्यातिनाम गुरू हुए। यदि कोई नौकरी के भाव से शिक्षक बनता है तो वह रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है जो आवश्यक भी है, लेकिन गुरू का कार्य प्रोफेशन से आगे मिशन भाव से कार्य करना है।
शिक्षकों पर भावी पीढ़ी के निर्माण का दायित्व
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विजनरी लीडर हैं। उनके दृढ़-संकल्प से एक सर्व सम्मत शिक्षा नीति-2020 भारत में आई है। इसके अंतर्गत ही शिक्षा व्यवस्थाएँ की जा रही हैं। मध्यप्रदेश का स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग नवीन शिक्षा नीति अच्छी तरह लागू करने के लिए बधाई का पात्र है। मध्यप्रदेश राष्ट्रीय सर्वे में 17वें नंबर से 5वें नंबर तक आया है। यह दोनों विभागों के परिश्रम का परिणाम है। शिक्षकों पर भावी पीढ़ी के निर्माण का दायित्व है। इस वर्ष 22 हजार से अधिक शिक्षक नियुक्त किए गए हैं। इन सभी का स्वागत है और यह भी अपेक्षा है कि नव नियुक्त शिक्षक भावी पीढ़ी के निर्माण का दायित्व निभायें। शिक्षक होना सिर्फ एक नौकरी नहीं समाज को बनाने का भी कार्य है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि यदि आपको बच्चों को सकारात्मक दिशा में बदलना है तो पहले स्वयं को बदलना होगा। उन्होंने एक मंदिर निर्माण में लगे तीन व्यक्तियों के अलग-अलग दृष्टिकोण का उदाहरण देते हुए कहा कि सबसे अच्छा दृष्टिकोण यह है कि यह सोच कर कार्य किया जाए कि इस कार्य का हमें शुभ अवसर या सुअवसर मिला है। मैं बेहतर से बेहतर योगदान दूँगा। उन्होंने कहा कि बच्चे मिट्टी के लौंदे होते हैं, उन्हें शिक्षक जैसा चाहे बना सकते हैं। स्वयं के लिए गुरू बनने का संकल्प लेंगे तो बच्चों को बनाने, मध्यप्रदेश को बनाने और भारत को बनाने में सबसे बड़ा योगदान देंगे। आप नया मध्य प्रदेश और नया भारत गढ़ सकते हैं। आचरण से ही हम सिखा सकते हैं सिर्फ भाषण से नहीं। चरित्रवान बच्चों के निर्माण से भारत बन कर खड़ा हो जाएगा।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उस कथन का उल्लेख किया कि शिक्षा मनुष्य को मनुष्य बनाती है। शंकराचार्य जी ने भी शिक्षा को इस लोक और परलोक में भी सही दिशा देने में उपयोगी बताया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं- विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल और नागरिकता के संस्कार देना।
ऐसे बच्चे तैयार करें जो जमाना बदल दें
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि वे स्वयं शिक्षक की भूमिका में रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर आज कल लाड़ली बहना योजना का पाठ पढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में दर्शन शास्त्र में एमए के बाद वे अल्प समय के लिए शिक्षण कार्य से भी जुड़े रहे। इसके पहले बाल्य काल में जैत ग्राम में उन्होंने रामायण की चौपाइयों की व्याख्या और अर्थ बताने का कार्य करते हुए एक वक्ता की पहचान बनाई थी। यह ग्राम के विद्यालय में गुरू से प्राप्त मार्गदर्शन का ही परिणाम था। उन्होंने मध्यप्रदेश गान का निर्माण करने का भी उल्लेख किया जो सभी नागरिकों के लिए प्रेरक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक का कार्यकाल औसत रूप से 30 साल माने तो हमें विचार करना चाहिए कि बेहतर गुरू बन कर ऐसे बच्चे तैयार करें जो जमाना बदल दें। शिक्षकों की भूमिका सार्थक होती है तो समाज भी शिक्षकों का आदर करता है और उनके चरण धोकर पीता है।
भैरूंदा के शिक्षकों के योगदान का उल्लेख, ग्राम के शिक्षक को भी याद किया
मुख्यमंत्री ने कहा कि भैरूंदा (नसरुल्लागंज) के शिक्षकों ने अपनी स्वयं की राशि से कक्षाओं को स्मार्ट क्लास बनाकर बच्चों को सहयोग दिया। यह शिक्षकों के सामाजिक योगदान का अनूठा उदाहरण है। उन्होंने अपने प्रायमरी के शिक्षक श्री रतन चंद जैन द्वारा दिए गए मार्गदर्शन का भी विशेष उल्लेख किया।
नव नियुक्त शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने शुभारंभ किया। मध्यप्रदेश गान के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों में पदस्थ किए गए कुछ शिक्षकों को प्रतीक स्वरूप नियुक्ति बधाई पत्र सौंपे। इन शिक्षकों में शेफाली गुर्जर जिला सीहोर, शुभम गुप्ता जिला नर्मदापुरम, हुकुम चंद राठौर जिला राजगढ़, राजेश घोटे जिला बैतूल, ममता गोयल जिला देवास और श्री आनंद मीना जिला देवास शामिल हैं।
राज्यपाल मंगूभाई पटेल और स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) इंदर सिंह परमार वर्चुअल जुड़े। जनजातीय कार्य मंत्री मीना सिंह ने प्रारंभिक संबोधन दिया। कार्यक्रम में योग आयोग के अध्यक्ष वेद प्रकाश शर्मा, पाठ्य-पुस्तक निगम के अध्यक्ष शैलेंद्र बरूआ, महर्षि पतंजलि संस्थान के अध्यक्ष भरत दास बैरागी, योग संस्था की अध्यक्ष पुष्पांजलि शर्मा, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा रश्मि अरूण शमी, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य पल्लवी जैन गोविल, आयुक्त लोक शिक्षण अनुभा श्रीवास्तव और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।