12HREG139 शांतिकुंज में रसियन सीख रहे वैदिक कर्मकांड
हरिद्वार, 12 अप्रैल (हि.स.)। शांतिकुंज में देश विदेश के साधक अपनी आंतरिक ऊर्जा के जागरण के तप साधना करते हैं, तो वहीं लोग अपने व्यक्तित्व को ऊंचा उठाने के लिए नैतिक प्रशिक्षण शिविर, व्यक्तित्व परिष्कार शिविर के साथ ही वैदिक कर्मकाण्ड, संगीत आदि विद्या भी सीखते हैं। इसी श्रृंखला में अपने 15 दिवसीय प्रवास में रसिया से सरगेई, नतालिया, ऐफगेनी, इगोर, रादा, अर्त्योम, अहिल्या, सेनिया आदि गायत्री तीर्थ पहुंचे हैं।
रसियन टीम देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या के मार्गदर्शन एवं डॉ. ज्ञानेश्वर मिश्र के संयोजन में साधना, वैदिक कर्मकाण्ड एवं भारतीय सुगम संगीत का प्रशिक्षण ले रहे हैं। भारतीय संस्कृति को अपनाने के लिए विश्वभर के लोग अपना कदम बढ़ा रहे हैं।
रसिया से आये सरगेई, अहिल्या, नतालिया का कहना है कि सन् 2012 अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या रसिया आये थे, तब हमने अपने परिवार एवं दोस्तों के साथ उनके कार्यक्रम में भाग लिया था, उस समय उन्होंने जो कुछ कहा और बताया, उससे हम लोग काफी प्रभावित हुए। उनसे गायत्री महामंत्र की दीक्षा ली और गायत्री साधना करने लगे। रसियन टीम ने कहा कि वास्तव में प्राचीन संस्कृति भारतीय संस्कृति है। यहां वसुधैव कुटुम्बकम की भावना है। इससे ही सेवा, सहयोग की प्रवृत्ति बढ़ती है। हम लोग डॉ. प्रणव पण्ड्या के आमंत्रण पर शांतिकुंज आये हैं और यहां भारतीय संस्कृति को जानने के लिए साधना पद्धति, वैदिक कर्मकाण्ड का अध्ययन, सीख रहे हैं। इसके अलावा भारतीय सुगम संगीत का अभ्यास कर रहे हैं। इसमें हमें बहुत आनंद आ रहा है। उन्होंने बताया कि शांतिकुंज से मिली मानवता की सीख, ज्ञान एवं विधा को रसिया में जन-जन पहुंचायेंगे।