मानव जीवन परमात्मा की सर्वश्रेष्ठ नियामतः प्रो. मनुदेव

07HREG97 मानव जीवन परमात्मा की सर्वश्रेष्ठ नियामतः प्रो. मनुदेव

हरिद्वार, 7 अप्रैल (हि.स.)। मानव जीवन परमात्मा की सर्वश्रेष्ठ नियामत है। अनेक जन्म-जन्मान्तर के संचित कर्मों के फलस्वरूप श्रेष्ठतम मानव जीवन प्राप्त होता है। निराकार परमात्मा के साकार स्वरूप को मानव मात्र को देखने से अनुभव किया जा सकता है।

गुरुकुल कांगडी समविश्वविद्यालय हरिद्वार की माता लालदेई यज्ञशाला में शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग के प्रांगण में आयोजित यज्ञ के अवसर पर प्रो. मनुदेव बंधु ने कहा कि जीवन में मध्य मार्ग सदैव श्रेष्ठ होता है। पंच तत्वों से बना संसार तीन गुण सतोगुण, रजोगुण तथा तमोगुण से संचालित होता है। रजोगुण की प्रधानता उत्तेजना, विचार, इच्छाएं बढ़ाती है। बहुत कुछ करने की इच्छा तथा अधिक खुशी एवं उदासी भी इस अवस्था से मिलती है। यह गुण जीवन को सर्वाधिक प्रभावित करता है।