हरिद्वार, 10 नवंबर (हि.स.)। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय स्थित फार्मेसी एवं शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धन्वन्तरि की जयंती आयुर्वेद के विकास में जुट जाने के आवाह्न के साथ मनाई गई। फार्मेसी में हवन के साथ भगवान धन्वन्तरि की विशेष पूजा-अर्चना की गयी।
अपने संदेश में अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि भगवान विष्णु का अंश ही धन्वन्तरि हैं। उन्हें आदि देव के रूप में माना जाता है। भगवान धन्वन्तरि ने ही शरीर से संबंधित शास्त्र आयुर्वेद की रचना की है। वे देवताओं के वैद्य थे।
संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने कहा कि भगवान धन्वन्तरि जयंती यही प्रेरणा देती है कि परमात्मा ने सर्वश्रेष्ठ मनुष्य काया दी है, तो उसे स्वस्थ रखकर जीवन उद्देश्य की दिशा में निरंतर गतिशील रहना चाहिए।