03HREG200 डॉ. बीकेएस संजय ऑथर्स फ्राम द वैली के जुलाई संस्करण में शामिल
देहरादून, 03 जुलाई (हि.स.)। पद्मश्री डॉ. बीकेएस संजय ने ऑथर्स फ्राम द वैली के जुलाई संस्करण में शामिल हुए। इसका आयोजन वैली ऑफ वर्ड्स, इंटरनेशनल लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टिवल ने वॉव कैफे-लाइब्रेरी-गैलरी-स्टूडियो में किया।
डॉ. संजय के नाम कई उपलब्धियां हैं जिनके लिए उन्हें वर्ष 2002, 2003, 2004 और 2009 में लिम्का बुक रिकॉर्ड एवं 2005 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में उनका नाम उल्लेखित किया जा चुका है। डॉ. संजय को उनकी प्रथम काव्य संग्रह उपहार संदेश का के लिए 2022 में “हिंदी की गूंज” संस्था द्वारा “काव्य भूषण सम्मान” से सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. संजय की रचनाओं में समाज के लिए प्रेम, स्नेह, सेवा और करुणा की सार्वभौमिक भावनाओं को भलि-भांति दर्शाया गया है।
हरिद्वार के लंढौरा स्थित चमनलाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य एवं हिंदी के प्रोफेसर डॉ. सुशील उपाध्याय ने हिंदी साहित्य की दुनिया के एक अन्य रत्न डॉ. सुशील उपाध्याय से बातचीत की। भाषा, मीडिया और साहित्य पर एक दर्जन से अधिक पुस्तकों के प्रकाशित लेखक, डॉ उपाध्याय ने हिंदी साहित्य और पत्रकारिता से संबंधित पचास शोध पत्र भी लिखे हैं।
महोत्सव के निदेशक डॉ. संजीव चोपड़ा आईएएस ने कहा कि एक डॉक्टर के लिए, जो चिकित्सा जगत के एक उद्यमी और पेशेवर नेता भी हैं, उनकी कविता की सरगर्मी असामान्य है लेकिन डॉ. संजय की कविताओं को पढ़ना वास्तव में आंखें खोलने वाली हैं। एक कविता जो कहती है कि दादी वास्तव में कभी बूढ़ी नहीं हो सकती है। बच्चे के जन्म के परीक्षणों और क्लेशों के साथ-साथ कोख से कब्र तक जीवन की यात्रा तक, उनकी कविताएं चिंतनशील तनाव में जीवन की यात्रा में वास्तविक अंतर्दृष्टि को दर्शाती हैं।