03HREG277 श्रद्धा के आरोहण का दिन है गुुरुपूर्णिमा : शैलदीदी
हरिद्वार,03 जुलाई (हि.स)। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि जीवात्मा को उनके पूर्व जन्मों के संस्कार के अनुसार मानव जीवन मिलता है, सद्गुरु से मिलने के बाद ही उस मानव जीवन का कायाकल्प होता है। डॉ. पण्ड्या शांतिकुंज में गुरुपूर्णिमा पर्व मनाने देश-विदेश से आये गायत्री साधकों को संबोधित कर रहे थे।
श्रीमद्भागवद्गीता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्रद्धा तत्व, संयम तत्व व श्रम तत्व का ज्ञान देकर सद्गुरु अपने का शिष्य को कायाकल्प करता है। युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के रूप में एक महान सद्गुरु हमारे बीच आयें, करोड़ों लोगों को दीक्षा दी और उन्होंने उनके जीवन में आमूलचूल परिवर्तन किया। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री प्रज्ञा की प्रखरता एवं श्रद्धा से ओतप्रोत थे। यही कारण है कि लाखों करोडो शिष्य उनके कार्यों को आगे बढ़ाने में एक साथ जुटे हैं।
इस अवसर पर शैलदीदी ने कहा कि श्रद्धा का आत्म निरीक्षण, आरोहण का दिन है गुरुपूर्णिमा। मानव जीवन के तीन महत्त्व श्रेणी है माता, पिता और गुरु। ऋषि आश्वालयन, पं श्रीराम शर्मा आचार्य जैसे सामर्थ्यवान सद्गुरु सदैव अपने शिष्य का कायाकल्प करता है और सद्गुरु अपने शिष्यों को जीवन के तमाम समस्याओं के समाधान सुझाता है। संस्था की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी ने कहा कि प्राचीन काल में सद्गुुरुओं ने जिस तरह अपने शिष्यों को श्रद्धावान, ज्ञानवान बनाने के साथ चहुंमुखी विकास किया।
गुरुपूर्णिमा के अवसर पर युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के प्रतिनिधि के रूप में डॉ पण्ड्या व शैलदीदी ने हजारों साधकों को गायत्री महामंत्र की दीक्षा दी। साथ ही पुंसवन, नामकरण, उपनयन सहित विभिन्न संस्कार बड़ी संख्या में निःशुल्क सम्पन्न कराये गये।
इस असवर पर शैलदीदी ने शांतिकुंज के तैयार किए गए एक मोबाइल एप आदि का विमोचन किया। इस मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से मुम्बई अश्वमेध यज्ञ में आने वाले परिजन समस्त जानकारी प्राप्त कर पायेंगे और अपने आने आदि की सूचना भी व्यवस्था मण्डल को दे सकेंगे। साथ ही हिन्दी, कन्नड़, मलयालम, छत्तीसगढ़ी में 15 पुस्तकें और शांतिकुंंज वीडियो रीजनल यूट्यूब चैनल्स का विमोचन हुआ।
देश विदेश के साधक चान्द्रायण व्रत में जुटे-
गुरुपूर्णिमा से प्रारंभ हो रहे चालीस दिवसीय चान्द्रायण व्रत के लिए भारत सहित कनाडा, आस्ट्रेलिया, अमेरिका आदि देशों के कई हजार साधक जुटे।