उत्तराखंड में लिंपियाधूरा से एक साथ होते हैं दो-दो कैलाश पर्वतों के दिव्य दर्शन

09HNAT33 उत्तराखंड में लिंपियाधूरा से एक साथ होते हैं दो-दो कैलाश पर्वतों के दिव्य दर्शन

-लिंपियाधूरा से एक साथ नजर आते हैं मुख्य कैलाश और छोटा कैलाश पर्वत

नैनीताल, 09 जुलाई (हि.स.)। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड में कार्यरत सहायक अभियंता जीएस जनौटी ने खुलासा किया है कि केवल लिपुपास पहाड़ी से ही नहीं, बल्कि इस क्षेत्र में कई स्थानों से पवित्र कैलाश पर्वत के दर्शन होते हैं। गत दिवस उत्तराखंड के लिपुपास दर्रे के पास से चीन के तिब्बत में स्थित भगवान शिव के धाम कैलाश पर्वत के दर्शन हो सकने की खबरें मीडिया की सुर्खियों में रही थीं।

वर्ष 2015 में इन स्थानों से कैलाश पर्वत के दर्शन कर चुके सहायक अभियंता जनौटी ने ‘हिन्दुस्थान समाचार’ को बताया कि इस संबंध में उन्होंने उच्चाधिकारियों और प्रदेश सरकार को जानकारी दी थी। अलबत्ता तत्कालीन सरकारों ने इसे अनसुना कर दिया था। अब इस संबंध में राज्य सरकार की पहल से वे भी खुश हैं।

साहसिक पर्यटन व पर्वतारोहण के शौकीन रहे और सीमांत पिथौरागढ़ जनपद के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सेवाएं देने के साथ थिनला पास को तीन बार पार कर चुके सहायक अभियंता जनौटी ने बताया कि लिपुपास पहाड़ी के साथ लिंपियाधूरा से भी कैलाश पर्वत के साथ छोटा कैलाश पर्वत के भी दिव्य दर्शन होते हैं।

उल्लेखनीय है कि छोटा कैलाश पर्वत, कैलाश पर्वत की ही प्रतिकृति है और इसकी भी कैलाश पर्वत की तरह ही बड़ी धार्मिक मान्यता है। उन्होंने बताया कि उन्हें कुटी गांव के एक ग्रामीण ने बताया था कि लिपुपास के बायीं ओर स्थित बायां पास के साथ ही लिंपियाधूरा से भी कैलाश पर्वत के दर्शन होते हैं। इसके बाद वे वहां गए और इसको देखा। उन्होंने बायां पास के लिए पैदल रास्ता भी बनवाया।

उन्होंने बताया कि लिंपियाधूरा से केवल 15-20 मीटर ऊपर चढ़ने पर एक मैदान सा स्थान आता है। वहां से उत्तर दिशा की ओर देखने पर मुख्य कैलाश पर्वत और दक्षिण दिशा की ओर देखने पर छोटा कैलाश पर्वत के दिव्य दर्शन होते हैं। उन्होंने स्वयं दोनों कैलाश पर्वतों के एक साथ दर्शन किए हैं। उन्होंने बताया कि यहां से कैलाश पर्वत की एरियल दूरी करीब 50 किमी तक होती है। कैलाश पर्वत के नंगी आंखों से यानी बिना किसी दूरदर्शी यंत्र के दर्शन होते हैं।