15HREG20 अब विंध्य क्षेत्र के किसान उगाएंगे इटली की स्ट्राबेरी, होंगे मालामाल
– मीरजापुर में 80 एकड़ जमीन पर होगी इटली के स्ट्राबेरी की खेती
– इटली से मंगाए गए स्ट्राबेरी के 6000 मदर प्लांट
– वर्तमान में 55 किसान 45 एकड़ में स्ट्राबेरी की कर रहे खेती
मीरजापुर, 15 जून (हि.स.)। विंध्य धरा पर अब इटली से मंगाए गए पौधों से स्ट्राबेरी की खेती की जाएगी। इसके लिए उद्यान विभाग ने इटली से छह हजार से अधिक स्ट्राबेरी के मदर प्लांट मंगाए जा चुके हैं। एक मदर प्लांट से 20 पौध तैयार किए जाएंगे। इससे किसानों का लगभग 190 रुपये प्रति पौध की बचत होगी।
पिछले वर्ष प्रयोग के तौर पर सिटी,सीखड़ व राजगढ़ ब्लाक में 45 एकड़ खेत में इटली के मोराने नवेला प्रजाति के स्ट्राबेरी की खेती की गई थी। वहीं इस बार विंध्य क्षेत्र के किसान 80 एकड़ जमीन पर खट्टे-मीठे स्वाद से खास पहचान रखने वाले स्ट्राबेरी की खेती कर मालामाल होंगे। इटली के पौंधाें से पैदा होने वाले स्ट्राबेरी अन्य की अपेक्षा में अधिक उपज वाले और स्वादिस्ट होने के कारण किसानों की आय निश्चित ही दोगुनी होगी। जिले भर में 55 किसान 45 एकड़ में स्ट्राबेरी की खेती कर रहे हैं।
जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम ने बताया कि किसान सितंबर व अक्टूबर माह में स्ट्राबेरी की खेती की जाएगी। मंगाए गए मदर प्लांट से लगभग एक लाख 20 हजार पौध तैयार किए जाएंगे। किसानों को 12 रुपया प्रति पौधे की दर से दिया जाएगा। एक बीघे में दो लाख की लागत आती है। स्ट्राबेरी का उत्पादन प्रतिवर्ष लगभग चार से पांच लाख रुपये तक का होता है। सरकार की तरफ से प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये अनुदान मिलता है। किसानों को एक बीघे की खेती में सात से आठ लाख रुपये का मुनाफा होगा। उन्होंने बताया कि इटली के पौधों की वेराइटी अलग होती है। फलों का आकार बड़ा और अपेक्षाकृत मीठा है। बाजार में इसकी मांग भी अच्छी रहती है।
अच्छी मांग से किसानों ने कमाया सात लाख रुपये
लालरंग के रसीले फल स्ट्राबेरी देखने में सुंदर तो लगता ही है, बाजार में अच्छी मांग भी है। इससे पिछले वर्ष स्ट्राबेरी की खेती करने वाले किसान पांच से सात लाख रुपये प्रति एकड़ कमाई कर लाभ में रहें।
यहां है खास मार्केट
मीरजापुर समेत पड़ोसी जनपद वाराणसी, सोनभद्र व प्रयागराज में रसीले स्ट्राबेरी फल को खूब पसंद किया जाता है। यहां के बाजार में स्ट्राबेरी के अच्छे दाम भी मिलते हैं।
धावक पैदा करती है पौधे की काम्पैक्ट वृद्धि की आदत
जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम ने बताया कि इतालवी अल्पाइन नामक यह इटालियन सदाबहार स्ट्राबेरी छोटी उंगली की नोक के आकार के सुगंधित, रमणीय, लघु जामुन का उत्पादन करती है। पौधे की काम्पैक्ट वृद्धि की आदत कुछ धावक पैदा करती है। जंगली स्ट्राबेरी की तरह गहरे लाल जामुन अधिक स्वादिष्ट होते हैं।
स्ट्राबेरी उगाने के लिए ऐसे खेत होंगे फायदेमंद
स्ट्राबेरी उगाने के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी फायदेमंद होती है। पौधा लगाने के लिए 5 से 6.5 पीएच वाली अम्लीय मिट्टी अच्छी मानी जाती है। 1:1 के अनुपात में मिट्टी और खाद को मिलकर आप इसमें स्ट्राबेरी के पौधे लगा सकते हैं।
पाली हाउस के अंदर और खुले खेतों में कर सकते हैं स्ट्राबेरी की खेती
उद्यान विभाग की ओर से पूना से पिछले वर्ष 300 स्ट्राबेरी के पौधे मंगाकर खेती आरंभ कराया गया था। यह स्ट्राबेरी नरम और स्वाद में हल्का खट्टा मीठा, फल होता है। सेहत के लिए काफी लाभदायक होता है। इसकी खेती पाली हाउस के अंदर और खुले खेतों में भी कर सकते हैं। कम समय में फल देने लगते है।
घर के आंगन में भी लगा सकते हैं स्ट्राबेरी
स्ट्राबेरी एंटीआक्सिडेंट, विटामिन सी, प्रोटीन और अन्य प्राकृतिक स्रोतों से भरपूर होता है। घर के आंगन में सूर्य की रोशनी वाली जगह पर आसानी से लगा सकते हैं।