14HREG407 अखाड़ा परंपरा में पंच परमेश्वर का फैसला सर्वोच्च : श्रीमहंत रविंद्रपुरी
हरिद्वार, 14 जून (हि.स.)। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के दो पक्षों में चल रहे विवाद को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि अखाड़ा परंपरा में पंच परमेश्वर का फैसला सर्वोपरि होता है। पंचों का निर्णय परमेश्वर के निर्णय के समान है। उन्होंने कहा कि जो पंच का विरोधी है वह परमेश्वर का विरोधी है।
मीडिया को जारी बयान में श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि अखाड़ा परंपरा में पंचों का स्थान सर्वोपरि है, इसीलिए उनका निर्णय भी सर्वमान्य होता है। यह सभी अखाड़ों में जहां-जहां पंचायती व्यवस्था होती है। वहां पर पंचपरमेश्वर द्वारा ही पदाधिकारी नियुक्त होते हैं। पंच योग्य व्यक्ति को ही पदों पर आसीन करते हैं, यदि कोई व्यक्ति पद का नाजायज फायदा उठाता है तो पंच परमेश्वर उसे बाहर निकालने का अधिकार भी रखते हैं। यह अखाड़ों की प्राचीन परंपराएं हैं।
श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने अपील करते हुए कहा कि बाहरी लोग अखाड़े से दूर रहें और हस्तक्षेप कर विवाद बढ़ाने का प्रयास ना करें। कोई भी व्यक्ति अखाड़े आश्रम के साधु संत या अन्य व्यक्ति पंच के फैसले पर उंगली उठाने का प्रयास न करे पंच का फैसला ही परमेश्वर का फैसला है।