गंगा दशहरा पर्व पर गंगोत्री धाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

30HREG131 गंगा दशहरा पर्व पर गंगोत्री धाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

-गंगोत्री धाम में हजारों भक्तों ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी

उत्तरकाशी, 30 मई (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री तीर्थधाम में गंगा दशहरा पर्व के अवसर पर अनुष्ठान का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों की तादाद में तीर्थयात्री और स्थानीय श्रद्धालुओं गंगोत्री पहुंचे।

मंगलवार को गंगोत्री धाम में भव्य झांकी निकाली गई। गंगा दशहरा के पावन पर्व पर गंगा की डोली में राजा भगीरथ की मूर्ति को रखा गया। मान्यता के अनुसार आज के ही दिन स्वर्ग लोक की देवी भगवती गंगा धरती पर अवतरित हुईं थीं। मां गंगा को धरती पर लाने के लिए राजा भगीरथ ने वर्षों तक कठोर तप किया था। इसके बाद गंगा धरती पर अवतरित हुईं थीं।

सुबह से ही गंगोत्री में गंगा स्नान और पूजन चल रहा है। गंगोत्री तीर्थ पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ गंगा लहरी गंगा पूजा किया। श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के बाद तीर्थ पुरोहित ने वैदिक मंत्रों, गंगा सहस्त्रनाम के साथ विधिवत रूप से मां गंगा की विशेष पूजा अर्चना, हवन एवं आरती की गई। गंगोत्री में गंगा दशहरा पर्व पर दिनभर गंगा सहस्त्रनाम व अन्य अनुष्ठान चलते रहे।

राजा भगीरथ की मूर्ति और गंगा की मूर्ति का श्रृंगार-

गंगा दशहरा पर राजा भगीरथ की मूर्ति और गंगा की मूर्ति का श्रृंगार किया गया। भगीरथ की मूर्ति को मां गंगा की डोली पर रखा गया। इसके बाद मंदिर परिसर से भगीरथ शिला होते हुए गंगा घाट तक झांकी निकाली गई।

गौरतलब है कि गंगोत्री धाम में राजा प्रकृति ने तपस्या की थी जो आज भी जहां भागीरथी शिला विराजमान है। इधर उत्तरकाशी में भी विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मणिकर्णिका घाट गंगा तट पर गंगा दशहरा के मौके पर गंगा पूजन किया। गंगा घाटों पर सुबह से ही उत्तरकाशी सहित समस्त गंगा घाटी में भक्तों ने आज गंगा में स्नान करके गंगा पूजन किया है। इधर गंगा दशहरे पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को लेकर के पुलिस प्रशासन ने पूरी तैयारी कर रखी थी।

पुलिस अधीक्षक अर्पण यदुवंशी ने बताया कि गंगोत्री तीर्थ धाम में एवं उत्तरकाशी के स्नान घाटों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था ना हो। उन्होंने बताया कि गंगा दशरथ मौके पर हजारों की संख्या में यहां श्रद्धालु पहुंचे हैं।

इस अवसर पर गंगा पुरोहित सभा के अध्यक्ष संजीव सेमवाल माधव सेमवाल अशोक सेमवाल, मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल, विंध्याचल सेमवाल ,राजेश सेमवाल आदि मौजूद रहे।