29HREG335 अशोकनगर: आदिवासी महिला सरपंच के अधिकार दबंगों के पास, निरंकुश पंचायती राज व्यवस्था
अशोकनगर, 29 मई (हि.स.)। पंचायत राज्य की जो कल्पना की गई थी, उस पंचायत राज का जिले में निरंकुश होती प्रशासनिक व्यवस्था के कारण मखौल उड़ता हुआ दिखाई देता है। और वह भी जो पंचायत आदिवासी महिला के लिए आरक्षित हो और आदिवासी महिला सरपंच के सील-पेड सभी अधिकार दबंगों के हाथ दिखाई दें तो इससे बढ़ा पंचायती राज का मखौल और क्या हो सकता है?
दर असल, यह किस्सा है जिला मुख्यालय से महज 17 किमी की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत खजुरिया कलां का। ग्राम पंचायत खजुरिया कलां आदिवासी महिला सरपंच के लिए आरक्षित हुई तो, यहां शीलाबाई आदिवासी महिला सरपंच चुनी गईं। पर हैरत की बात है कि जब से वे सरपंच चुनी गईं हैं उन्हें कोई सरपंच के अधिकार पता और पंचायत में क्या निर्माण कार्य हो रहे न उनका पता।
हिन्दुस्थान समाचार ने जब मौके पर आदिवासी महिला सरपंच से उनकी सरपंची के बारे में जानना चाहा तो उनका स्पष्ट कहना था कि उनकी पंचायत में क्या चल रहा है उसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं। जब उनसे उनके सरपंची के अधिकार सील-पेड आदि के बारे में जानने का प्रयास किया तो उनके पति मान सिंह का कहना था कि वह सब पूर्व सरपंच के पास हैं उनके पास कुछ भी नहीं। जब उनसे गांव में होने वाले सडक़ निर्माण, तालाब निर्माण आदि के बारे में जानना चाहा तो, उनका कहना था कि हां निर्माण कार्य तो हो रहे हैं, पर कौन करा है इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
कई पंचायतें दबंगों के कब्जे में:
जिला मुख्यालय के नजदीक ग्राम पंचायत खजुरिया कलां के अलावा भी जिले में अनेकों ऐसी ग्राम पंचायतें हैं जो कही अनुसूचित जाति वर्ग तो कहीं आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। जिले में निरंकुश प्रशासनिक व्यवस्था के कारण ऐसी अनेकों ग्राम पंचायतों पर गांव के दबंगों का कब्जा है और वही पंचायत की संचालन कर रहे हैं।
जनपद पंचायत अशोकनगर के तहत आने वाली खजुरिया कलां पंचायत को लेकर जब जनपद पंचायत सीईओ संदीप यादव का कहना था कि मेरे पास इस संबंध में समय नहीं है और मुझे किसी प्रकार का स्पष्टीकरण देने कलेक्टर ने मना कर रखा है।
वहीं जनपद पंचायत के सदस्य निखिल प्रताप का कहना है कि पंचायती राज व्यवस्था में आदिवासी महिला सरपंच के साथ यह न्याय नहीं है, यह निरंकुश प्रशासनिक व्यवस्था का होना है, जिस पर अंकुश लगना चाहिए।