राष्ट्रीय चेतना का निर्माण पत्रकारिता से सम्भव हुआ : प्रो मुन्ना तिवारी

21HREG290 राष्ट्रीय चेतना का निर्माण पत्रकारिता से सम्भव हुआ : प्रो मुन्ना तिवारी

–आज पठनीयता की समस्या पत्रकारिता की प्रमुख समस्या बन रही

–प्रयाग ने हिंदी पत्रकारिता को महत्वपूर्ण योगदान दिया : डॉ धनंजय

प्रयागराज, 21 मई (हि.स.)। हिन्दी पत्रकारिता और साहित्य की जुगलबंदी से समाज को चेतना प्राप्त होती है। राष्ट्रीय चेतना का निर्माण इसी पत्रकारिता से सम्भव हुआ है। जागरण का भाव पत्रकारिता का प्रमुख भाव है। आज पठनीयता की समस्या पत्रकारिता की प्रमुख समस्या बनती जा रही है।

यह बातें बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के प्रो. मुन्ना तिवारी ने ’हिंदी पत्रकारिता और साहित्य निर्माण’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतिम दिवस पर कहीं। जेएनयू के डॉ.मलखान सिंह ने कहा कि हमें सकारात्मकता के साथ पत्रकारिता की चुनौतियों से निपटना चाहिए। रचना समय की उपज है, इसी तरह पत्रकारिता भी अपने समय की ही उपज होती है और उसके सवाल भी अपने समय के सवाल होते हैं।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ. धनंजय चोपड़ा ने कहा इलाहाबाद शहर स्वराज पत्रिका का शहर है, 1868 की ’वृतांत दर्पण’ हो या बाद की ’हिंदी प्रदीप’ ’प्रयाग समाचार’ हो अथवा ’अभ्युदय’ प्रयाग ने हिंदी पत्रकारिता को महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रयाग, प्रयोगों का शहर है, चाहे कुंभ की भीड़ को संभालने का प्रयोग हो, पांच प्रधानमंत्रियों का प्रयोग हो या फिर साहित्यिक आंदोलनों का प्रयोग, प्रयाग का सशक्त हस्तक्षेप सब जगह मिलता है। पत्रकार के निर्माण में उसका मोहल्ला, परिवार, स्कूल, आसपास आदि सबका महत्व है। पत्रकारिता चुनौतीपूर्ण और कठिन काम है। आज के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जमाने में पत्रकारिता और चुनौतीपूर्ण हुई है। इस सत्र का संचालन हिंदी विभाग इविवि के डॉ. शिव कुमार यादव व धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी के संयोजक, हिन्दी विभाग इविवि के डॉ. राजेश कुमार गर्ग ने किया।

समापन सत्र में प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जू भैया विश्वविद्यालय के डॉ आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि कविवचन सुधा और बालाबोधनी जैसी पत्रिकाओं से जिन पत्रकारिता सम्बंधी मूल्यों का निर्माण हुआ था उसकी निर्मिति में केशवराम भट्ट, प्रताप नारायण मिश्र, लाला सीताराम भूप, ठाकुर जगमोहन सिंह और अंबिका दत्त व्यास जैसे पत्रकारों का महत्त्वपूर्ण योगदान है।

इविवि की डॉ. विभु खरे दास ने कहा कि ओटीटी जैसे माध्यमों में जिन मूल्यों को चुनौती दी जा रही है हिंदी पत्रकारिता को उस तरफ भी ध्यान देना चाहिए। जेएनयू के प्रो. हरिराम मिश्र ने कहा हिंदी पत्रकारिता को मूल्यरक्षा की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विवि के प्रो. अवधेश कुमार ने कहा साहित्य अखबारों की कतरनों से नहीं पैदा होता बल्कि वह पल्लव ग्राही पत्रकारों और आकाश धर्मा विचारकों से बनता है। सस्ती लोकप्रियता और तात्कालिकता आज पत्रकारिता की प्रमुख चुनौतियां बनकर उभरी हैं। समापन सत्र का संचालन इविवि के डॉ. वीरेंद्र कुमार मीणा व धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी के संयोजक डॉ.राजेश कुमार गर्ग ने किया।