07HREG81 गायत्री और यज्ञ हमारी संस्कृति के माता-पिता : शैल दीदी
-शांतिकुंज की ब्रह्मवादिनी बहनों ने वर्चुअल कराया वैदिक कर्मकाण्ड
हरिद्वार, 07 मई (हि.स.)। शांतिकुंज के संचालित गृहे-गृहे गायत्री यज्ञ उपासना अभियान के द्वितीय चरण में भारत सहित अमेरिका, आस्ट्रेलिया, मॉरिशस, इंग्लैण्ड, कनाडा, चीन, दक्षिण अफ्रीका आदि देशों के लाखों घरों में गायत्री यज्ञ हुआ। एक साथ एक समय में प्रातः नौ बजे शंखनाद के साथ यज्ञ का शुभारंभ हुआ। शांतिकुंज की ब्रह्मवादिनी बहनों ने यज्ञ का वैदिक कर्मकाण्ड वर्चुअल माध्यम से कराया गया। इस अभियान में देश-विदेश के अनेक परिजन जुड़े।
इस अवसर पर अपने संदेश में अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रमुख शैल दीदी ने कहा कि यज्ञ और गायत्री हमारी देव संस्कृति के दो मूल आधार हैं। इसी से यज्ञ को भारतीय संस्कृति का पिता और गायत्री को उसकी माता कहा गया है। इनके बिना हमारा अस्तित्व ही अधूरा है। उन्होंने कहा कि पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय अराजकताओं और आपराधिक अवांछनीयताओं को समूल नष्ट करने हेतु यज्ञ (सत्कर्म) और गायत्री (सद्ज्ञान) ही अमोघ ब्रह्मास्त्र है। इन दोनों को भूल जाने के कारण ही भारतीय समाज की आज इतनी दुर्दशा हुई है।
उन्होंने कहा कि दुष्प्रवृत्तियों के दुर्गंधयुक्त दल-दल में आकंठ डूबे हुए मनुष्य को उबारने के लिए ही इन दिनों गृहे-गृहे गायत्री यज्ञ उपासना अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी वर्ष 2026 तक दो करोड़ नये घरों तक गायत्री यज्ञ उपासना का विस्तार का लक्ष्य है।
इस अभियान के समन्वयक केदार प्रसाद दुबे ने बताया कि यह एक दिवसीय कार्यक्रम नहीं है, वरन यह प्रखर वैश्विक अभियान का एक चरण है। भारत को विश्व गुरु की भूमिका निभाने में पुनः सक्षम बनाने के लिए इक्कीसवीं सदी उज्ज्वल भविष्य के ऋषि उद्घोष को साकार करने में इस अभियान का महत्वपूर्ण योगदान होगा। उन्होंने बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग से बचने के लिए अपने जन्मदिन, वैवाहिक दिन के अवसर पर एक एक पौधा रोपने के लिए भी प्रेरित किया।
शांतिकुंज से आनलाइन संचालित हुए यज्ञीय प्रक्रिया से अनेकानेक लोग जुड़े। तो वहीं प्रशिक्षित स्थानीय प्रज्ञा संस्थानों से जुड़े पुरोहितों ने भी सम्पन्न करवाया। यज्ञ का सजीव प्रसारण यूट्यूब चैनल-शांतिकुंज वीडियो में किया गया।