23HREG401 ग्वालियर: राजा परीक्षित जन्म की कथा सुन भावविभोर हुए श्रोता
-श्रीमद् भागवत कथा में दूसरे दिन बड़ी संख्या में पहुंचे भक्त
ग्वालियर, 23 मई (हि.स.)। भगवान सदैव ही अपने भक्तों के भक्ति भाव में बंधे होते हैं और वे भक्तों की पुकार को कभी भी अनसुना नहीं करते हैं। भक्त पर विपदा आने पर भगवान स्वयं ही उसे हरने के लिए कष्ट सहते हैं, किन्तु भक्तों को कोई कष्ट नहीं होने देते हैं। इस कलयुग रूपी भवसागर से पार पाने का एकमात्र उपाय प्रभु का नाम सुमिरन करना ही है। प्रभु नाम सुमिरन करने पर ही भवसागर से पार पाया जा सकता है। उक्ताशय के विचार अर्जुन नगर में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन भगवताचार्य पंडित पं अतुल कृष्ण महाराज ने व्यक्त किए।
श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन पं अतुल कृष्ण महाराज राजा परीक्षित जन्म, एवं उनके चरित्र वर्णन की शुकदेव भगवान का आगमन, सृष्टि उत्पत्ती व शिव पार्वती विवाह की कथा सुनाई। कथा वाचक ने कहा कि,कलयुग के प्रभाव से राजा परीक्षित ने ऋषि श्रृंगी के गले में मरा हुआ सर्प डाल दिया था और ऋषि ने उन्हें श्राप दिया कि ठीक सातवें दिन सर्प के काटने से उनकी मृत्यु हो जाएगी। उसी श्राप के निवारण के लिए वेद व्यास द्वारा रचित भागवत कथा शुकदेव द्वारा सुनाई गई। जिसमें उनका उत्थान हो गया।
राजा परीक्षित ने सात दिन भागवत सुनकर किस तरह अपना उद्धार कर लिया। उसी तरह प्रत्येक व्यक्ति को भागवत का महत्व समझना चाहिए। भागवत अमृत रूपी कलश है। जिसका रसपान करके आदमी अपने जीवन को कृतार्थ कर लेता है।
ध्रुव चरित्र सृष्टि की रचना पर प्रकाश डालते हुए आचार्यवर ने कहा कि मनुष्य जीवन आदमी को बार-बार नहीं मिलता है इसलिए इस कलयुग में दया धर्म भगवान के स्मरण से ही सारी योनियों को पार करता है। मनुष्य जीवन का महत्व समझते हुए भगवान की भक्ति में अधिक से अधिक समय देना चाहिए। इस दौरान कथा में सुनाए गए भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे।