चिकित्सा क्षेत्र में नये प्रयोग से मिली रोगी को राहत

18HREG112 चिकित्सा क्षेत्र में नये प्रयोग से मिली रोगी को राहत

देहरादून, 18 अप्रैल (हि.स.)। चिकित्सा क्षेत्र में नये-नये प्रयोग हो रहे हैं। कैंसर के संदर्भ में एक विशेष प्रयोग हुआ है। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने एक 69 वर्षीय रोगी के लीवर से कैंसर की कोशिकाओं को हटाने के लिए कंप्लीटेशन रैडिकल कोलेसिस्टेक्टोमी का प्रयोग किया, जिससे रोगी को राहत मिली है।

कंप्लीटेशन रैडिकल कोलेसिस्टेक्टोमी और लीवर का वेज रिसेक्शन इस पर निर्भर करता है कि कैंसर कहां है और यह कितनी दूर तक फैल चुका है। एक विस्तारित कोलेसिस्टेक्टोमी कम से कम गॉलब्लैडर में, गॉलब्लैडर के बगल में, लिवर टिश्यू का लगभग एक इंच या अधिक साथ ही आसपास के सभी लिम्फ नोड्स को व्यवस्थित करती है। इसी संदर्भ में चिकित्सकों ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत की।

चिकित्सकों के अनुसार इस मरीज के लिवर कैंसर का तब पता चला, जब वह अस्पताल में गॉलब्लैडर सर्जरी के लिए आयी थी। सर्जरी के दौरान, डॉक्टरों ने उसके गॉलब्लैडर की थैली के चारों ओर एक बड़ा ऊतकों का समूह देखा जो की सामान्यता नहीं दिखाई नहीं दे रहा था। यह प्रक्रिया एक सर्जिकल जीआई ऑन्कोलॉजिस्ट ने की थी, जिसमें लीवर और आसपास के ऊतकों के एक हिस्से को सफलतापूर्वक हटा दिया था और रोगी का जीवन बच गया।

डॉ. विशाल निधि कुलश्रेष्ठ, प्रिंसिपल कंसल्टेंट, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और हेपेटोपैंक्रिएटोबिलरी (एचपीबी) सर्जिकल ऑन्कोलॉजी ने बताया कि मरीज को पिछले तीन महीनों से पेट में गंभीर दर्द हो रहा था और कई डॉक्टरों से परामर्श लेने और दवाइंया लेने के बाद भी यह दर्द कम नहीं हो रहा था। पहले वह गॉल स्टोन हटाने की सर्जरी के लिए मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, देहरादून आई थी, लेकिन इलाज के दौरान, डॉक्टरों ने उसके गॉलब्लैडर के चारों ओर एक बड़ा ऊतकों का समूह दिखा जो सामान्य स्थिति में दिखाई नहीं दे रहा था।

उन्होंने ऊतकों के इस समूह का एक नमूना लिया और इसे मूल्यांकन के लिए भेजा, जिससे पता चला कि यह कैंसर था जो लीवर और अन्य क्षेत्रों में फैल सकता था। मरीज की पिछली सर्जरी से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद, हम जानते थे कि कैंसर को शरीर में फैलने से रोकने के लिए उन्हें जल्दी इलाज करना होगा। एक महीने के भीतर, हमने कंप्लीटेशन रैडिकल कोलेसिस्टेक्टोमी की, जिसमें पिछली सर्जरी के समान बड़े हुए ऊतकों को काटना और पिछले बार हुई रक्तस्राव की जटिलताएं को ध्यान में रखते हुए मरीज की जान बचायी। यह सर्जरी सफल रही और मरीज अब स्वस्थ जीवन जी रहा है।

कंसल्टेंट, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी डॉ. मयंक नौटियाल ने कहा, ”मैक्स अस्पताल में एक लीवर क्लीनिक भी है, जो लीवर फिजिशियन और सर्जन दोनों उपलब्ध कराता है। डॉ. करमजोत सिंह बेदी ने बताया कि यह अस्पताल स्वस्थ्य क्षेत्र में प्रचलित सभी नवीनतम उपचार और तकनीकों से सुसज्जित है और गंभीर मामलों को संभालने के लिए विशेषज्ञों डॉक्टरों का पैनल उपलब्ध है ।