15HREG293 धारः अस्पताल ने कोरोना से मौत बताकर किया था अंतिम संस्कार, वह दो साल बाद वापस लौटा
धार, 15 अप्रैल (हि.स.)। जिले के ग्राम बड़ौदा के एक निजी अस्पताल में दूसरे कोरोना काल में उपचार के दौरान चिकित्सकों द्वारा 40 वर्षीय एक युवक को मृत घोषित कर उसका वहीं अंतिम संस्कार कर दिया था, लेकिन दो साल बाद अचानक मृतक अपने घर वापस लौट आया है। हांलाकि, इस दौरान वह किसी गिरोह के द्वारा बंधक बनाकर प्रताड़ित किए जाने की बात कह रहा है। जैसे ही मौका मिला वह वहां बदमाशों के चंगुल से भागकर शुक्रवार रात उसके मामा के घर अपने ही जिले के सरदारपुर तहसील में पहुंच गया। वहां पुलिस को सूचना दी। अब उसे कानवन थाने लाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम कड़ोदकला निवासी कमलेश पुत्र गेंदालाल पाटीदार मंत्री को साल 2021 में कोरोना हो गया था। कोरोना के उपचार के लिए उसे बड़ौदा के निजी अस्पताल ले जाया गया। जहां उपचार के दौरान डाक्टरों ने कमलेश को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल की सूचना पर परिजन अस्पताल पहुंचे, लेकिन कोरोना संक्रमित होने से परिजनों को मृतक का शव दूर से ही दिखाया। पोलीथीन में लिपटी देह को पुष्टि के साथ पहचानना संभव नहीं था। चिकित्सकों के कहने पर परिजनों ने उसे कमलेश ही मान लिया। संक्रमित होने की मृत्यु होने पर शव परिजनों को नहीं सौंपते हुए बड़ौदा में ही कोविड टीम ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
अस्पताल प्रबंधन के रिकार्ड के अनुसार मृत मानकर परिजनों ने घर पर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए शोक निवारण कार्यक्रम की रस्म का आयोजन भी कर दिया था। बेटे के निधन से पिता गेंदालाल गहरे सदमे में पहुंच गए थे जो आज तक भी उबर नहीं पाए। वहीं पत्नी भी दो वर्ष से विधवा का जीवन व्यतीत कर रही थी, लेकिन जैसे ही कमलेश के जीवित होने की सूचना मिली तो उनके गमगीन चेहरों पर खुशियों की रौनक लौट आई।
शनिवार सुबह बेटे कमलेश के जीवित होने की सूचना गेंदालाल के ससुराल वड़वेली (सरदारपुर) मिली तो पिता को यकायक विश्वास नहीं हुआ। तत्काल वीडियो काल कर कमलेश के होने की पुष्टि की। कमलेश भी अपने पिता व परिजनों को देखकर भावुक हो गया। इसके बाद सभी परिजन बड़वेली पहुंचे। मेल मुलाकात के बाद उसके जीवित होने की पुष्टि के लिए शासकीय प्रक्रिया पूर्ण करने हेतु सरदारपुर थाने पर सूचना दी गई। किंतु युवक कड़ोदकला निवासी है जो कानवन थाने के अंतर्गत आता है, इसलिए सरदारपुर पुलिस ने उसे संबंधित थाने पर ले जाने की सलाह दी।
परिजनों ने बताया कि कमलेश ने कोरोना में ठीक होने के बाद अहमदाबाद में किसी गिरोह के चंगुल में होने की जानकारी दी। उसने बताया कि उसे अहमदाबाद में पांच से सात युवकों द्वारा बंधक बनाकर रखा गया था और उसे एक दिन छोड़कर नशीली दवाओं का इंजेक्शन दिया जाता था, जिससे वह हर समय बेसुध ही रहता था। शुक्रवार को चार पहिया वाहन से अहमदाबाद से कहीं और ले जा रहे थे। इसी दौरान गिरोह के लोग एक होटल पर स्वल्पाहार के लिए रूके। इसी बीच मौका पाकर वह अहमदाबाद से इंदौर आ रही यात्री बस को देखकर चार पहिया वाहने से उतरकर बस में बैठ गया। देर रात्रि में सरदारपुर उतरा एवं वहां उपस्थित लोगों को अपने मामा के घर वड़वाले पहुंचने की बात कही। तब लोगों के सहयोग से वह वड़वेली पहुंचा था।