04HREG311 रेलवे पीड़ितों की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशान्त भूषण पहुंचे हल्द्वानी, रेलवे भूमि को देखा
हल्द्वानी, 04 मार्च (हि.स.)। उत्तराखंड के हल्द्वानी के बहुचर्चित रेलवे प्रकरण की पीड़ितों की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशान्त भूषण आज हल्द्वानी पहुंचे। यहां उन्होंने रेलवे की बताई जा रही जमीन का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ उत्तराखंड समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रभारी हाजी अब्दुल मतीन सिद्दीकी भी मौजूद रहे।
बीती 7 फरवरी को उच्चतम न्यायालय दिल्ली में हुई सुनवाई में न्यायालय ने रेलवे को 8 सप्ताह का समय देते हुए आगामी 2 मई को मामले की सुनवाई करने का फैसला सुनाया था। अब 2 मई को होने वाली सुनवाई पर रेलवे प्रकरण पर पीड़ितों की नज़र है।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बताया कि मतीन सिद्दीकी के पुत्र के विवाह समारोह में शामिल ना होने के चलते आज वे वर वधू को आशीर्वाद देने के लिए हल्द्वानी आए हैं। प्रशांत भूषण ने बताया कि आज उन्होंने रेलवे प्रकरण भूमि का स्वयं ग्राउंड जीरो पर निरीक्षण भी किया। उन्होंने कहा कि रेलवे प्रकरण भूमि पर काफी सरकारी निर्माण हुए हैं, जिसमे सरकारी स्कूल ट्यूबवेल बैंक आगनबाड़ी और काफी पुराना मंदिर, मस्जिद और धर्मशाला भी बनी हुई हैं। साथ ही पचास से सौ साल तक की पुरानी आबादी है।
उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट का एक पक्षीय निर्णय था जिस पर उच्चतम न्यायालय ने रोक लगाई है। ग्राउंड जीरो पर देखने से प्रतीत होता है कि रेलवे को इतनी जमीन की आवश्यकता नहीं है जितनी की बताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट इस इस मामले में जमीनी सच्चाई को भी ध्यान में रखते हुए अपना निर्णय देगा। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट रेलवे प्रकरण से पीड़ित लोगों के हक में फैसला करेगी।
समाजवादी पार्टी प्रदेश प्रभारी हाजी अब्दुल मतीन सिद्दीकी ने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि जिन वरिष्ठ वकीलों के लिए कई कई दिन लोग टाइम लेने के लिए खड़े रहते हैं। ऐसे सीनियर वकील मेरे घर आकर बच्चों को आशीर्वाद देने आए और रेलवे प्रकरण में मानवता को दृष्टिगत रखते हुए हर संभव न्याय दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। उनके लिए हम सभी सदा आभारी रहेंगे। हमें यकीन है कि उच्चतम न्यायालय हमारे हक में बेहतर फैसला करेगा।