04HREG358 नदियों का चैनेलाइजेशन के साथ क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत तत्काल की जाए : महाराज
देहरादून, 04 मार्च (हि.स.)। सिंचाई मंत्री ने सिंचाई विभाग की क्षतिग्रस्त चलने योग्य नहरों की मरम्मत के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही आगामी ग्रीष्मकाल में पेयजल की कमी के दृष्टिगत समस्त नहरों को चलाने के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए।
प्रदेश के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग की शनिवार को यमुना कॉलोनी स्थित सिंचाई भवन में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित स्त्रोतों और गदेरों में बहने वाले अतिरिक्त जल को संग्रहण करने को टैंकों का निर्माण किया जाना चाहिए, जिससे ग्रीष्मकाल में जल का उपयोग पेयजल के लिए किया जा सके।
सिंचाई मंत्री महाराज ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद रुद्रप्रयाग में लस्तर नहर के निर्माण को नवीन डीपीआर तैयार करते हुए कार्य प्रारम्भ किये जाने हेतु कार्यवाही की जाए और नवीन डीपीआर में पूर्व में आपूर्ति लिये गये पाइपों का भी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
मंत्री ने कहा कि जमरानी एवं सांग बांध परियोजना के लिए पुनर्वास किये जाने में पर्वतीय क्षेत्रों के संयुक्त खातों एवं बंटवारा न होने के सम्बन्ध में स्थिति साफ करने के बाद ही मुआवजे आदि पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाये।
उन्होंने कहा कि राज्य की विभिन्न नदियों के तल आवासीय एवं अन्य क्षेत्रों में ड्रेजिंग और आर.बी.एम.निस्तारण न होने से ऊंचे होने के कारण प्रतिवर्ष बाढ़/जलभराव की स्थिति उत्पन्न होती है। इसके निराकरण के लिए विभाग की ओर से माह अप्रैल, 2023 तक उक्त स्थलों का चिन्हीकरण करते हुये जिलाधिकारी के माध्यम से आर.बी.एम. का निस्तारण और नदियों का चैनेलाइजेशन सुनिश्चित किया जाए।
मंत्री महाराज ने कहा कि जमरानी एवं सौंग बांध परियोजनाओं की केन्द्र सरकार से स्वीकृति को प्रभावी कार्रवाई की जाए और इस हेतु विशेष रूप से अधिकारियों की नियुक्ति करते हुए निर्देशित किया जाए। राज्य में अवस्थित सभी डैमों की बांध सुरक्षा के दृष्टिगत विशेष कार्यशाला आयोजित की जाये। सभी डेमो की से सुरक्षा सम्बन्धित बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए सुरक्षा की दृष्टि से कार्ययोजना भी तैयार की जाए।
राज्य में अवस्थित जलाशयों की सुरक्षा विश्लेषण भूकम्प की दृष्टि से भी अनिवार्य रूप से की जाये। समीक्षा बैठक में जीर्ण-शीर्ण तथा बन्द नहरों को चलाये जाने हेतु विस्तृत कार्ययोजना तैयार करते हुए स्वीकृति को प्रस्ताव शासन को तत्काल उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए।
सिंचाई मंत्री ने रामनगर में स्थित भरतपुरी-पम्पापुरी बाढ़ सुरक्षा योजना की तत्काल स्वीकृति के लिए कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही नाले में वन क्षेत्र में स्थित फूल ताल से आने वाले पानी की सीधी निकासी नदी में करने के लिए परीक्षण करवाने को भी कहा।
उन्होंने कहा कि सतपुली और स्यूंसी में झील निर्माण हेतु संशोधित डीपीआर शीघ्र तैयार करते हुए स्वीकृति के लिए माह अप्रैल में शासन को सुसंगत मद में उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित करें योजनाओं में सिंचाई, पेयजल व पर्यटन अवयव को अवश्य शामिल किया जाए।
समीक्षा बैठक में संयुक्त सचिव जे.एल. शर्मा, सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता जयपाल, लघु सिंचाई विभाग के एचओडी बी.के तिवारी, पुनीत कुमार मल्ल, राजीव रंजन, आर.के. गुप्ता, आर. के. तिवारी, संजीव कुमार श्रीवास्तव, प्रशांत बिश्नोई, नवीन, सुभाष चंद्रा, डीसी सनवाल, पी.के. सिंह सहित अनेक सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद थे।