03HREG93 आईआईटी रुड़की में जनजातीय विकास पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन
हरिद्वार, 03 फ़रवरी (हि.स.)। मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग आईआईटी रुड़की ने शुक्रवार को दो दिवसीय (03 व 04 फरवरी) भारत में जनजातीय विकासः संभावना और पुनरावलोकन विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। संगोष्ठी को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा प्रायोजित किया गया। यह सम्मेलन आजादी का अमृत महोत्सव का हिस्सा है।
दो दिवसीय संगोष्ठी में प्रतिष्ठित कर्मियों ने भारत में आदिवासी समुदाय की स्थिति के बारे में बात की।
मानव विकास संस्थान के विजिटिंग प्रोफेसर वर्जिनियस सक्सा ने कहा कि राज्यों और क्षेत्रों के संदर्भ में, जनजातीय समुदायों की विविधता और भौगोलिक विस्तार के चलते, जनजातीय विकास के स्तरों में महत्वपूर्ण भिन्नताएं हैं। उदाहरण के लिए, शिक्षा के क्षेत्र में की गई प्रगति अपर्याप्त है। मिजोरम और नागालैंड जैसे अधिकांश पूर्वोत्तर राज्यों ने साक्षरता के क्षेत्र में क्रमशः 91.51 प्रतिशत और 80.04 प्रतिशत (2011 की जनगणना) के प्रभावशाली रिकॉर्ड हासिल किए हैं।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर केके पंत ने कहा कि भारत में जनजातियां देश की कुल आबादी का लगभग 8.6 प्रतिशत हैं। जनजातियों के सामाजिक-सांस्कृतिक हितों और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष रूप से संबंधित मुद्दों पर कई विशेष संवैधानिक प्रावधान बनाए जा रहे हैं, इनमें सकारात्मक कार्रवाई, प्रशासन के मुद्दे, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, और संसाधनों तक पहुंच, इत्यादि प्रमुख हैं।