विचार ही सामाजिक सांस्कृतिक आर्थिक परिवर्तन का आधार बनेगा : विनायक राव देशपांडे

30HREG94 विचार ही सामाजिक सांस्कृतिक आर्थिक परिवर्तन का आधार बनेगा : विनायक राव देशपांडे

– सामाजिक भेदभाव दूर होने से ही धर्मांतरण रूक सकता है

– विहिप की सामाजिक समरसता गोष्ठी

प्रयागराज, 30 जनवरी (हि.स.)। विश्व हिन्दू परिषद, माघ मेला शिविर में सोमवार को सामाजिक समरसता गोष्ठी आयोजित हुई। मुख्य अतिथि विहिप के केंद्रीय संगठन महामंत्री विनायकराव देशपांडे ने कहा कि भाषा, प्रांत, जाति से पहले हम हिन्दू हैं, यह विचार ही सामाजिक सांस्कृतिक आर्थिक परिवर्तन का आधार बनेगा। सामाजिक भेदभाव, अस्पृश्यता, जाति व्यवस्था एवं छुआछूत समाप्त हो, तभी धर्मांतरण रुक सकता है।

उन्होंने कहा कि हमारे आराध्य भगवान श्रीराम हैं हम उनको अपना आदर्श मानते हैं। राम केवट के हैं, राम निषाद के हैं, राम शबरी के हैं। कथनी और करनी में अंतर ना हो कण-कण में भगवान हैं। 12वीं सदी के पहले न पर्दा प्रथा थी, बाल विवाह था। सारी बुराइयां 12वीं सदी के बाद आई हैं। सर्वाधिक अत्याचार मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा किया गया है। लाखों हिंदुओं का नरसंहार हुआ। विदेश से आए आक्रांताओं से लड़ने में जो हार गए उनका शोषण किया गया और उन्हें ऐसे कार्य करने पड़े जो मानवीय दृष्टिकोण से ठीक नहीं था। वह धार्मिक योद्धा है जिन्होंने धर्म परिवर्तन नहीं किया। आक्रांताओं के अत्याचार सहे विश्व हिंदू परिषद अपनी स्थापना से समरस समाज के लिए कार्य कर रहा है।

केन्द्रीय संगठन मंत्री ने कहा कि हम हिन्दू एक हैं। ऐसे धार्मिक योद्धाओं का सम्मान विश्व हिंदू परिषद करेगी। हम सभी भारत माता के पुत्र हैं सभी मंदिरों में धार्मिक योद्धाओं का प्रवेश हो। सारे संसाधनों पर उनका बराबर अधिकार हो। विहिप का प्रथम सम्मेलन इसी पुण्य भूमि पर सामाजिक समरसता को लेकर हुआ था। आज विश्व हिन्दू परिषद अनेक संतों के माध्यम से समरसता के लिए समाज में जागरण का कार्य कर रहा है। सभी हिन्दू समाज अपने धर्म एवं संस्कृति की रक्षा संवर्धन संरक्षण के लिए जागरूक हों, जो समाज राष्ट्र अपनी संस्कृति को भूल जाता है वह समाज और राष्ट्रीय ही समाप्त हो जाता है। पूर्व में कभी भी अस्पृश्यता और जाति का स्थान नहीं रहा है। आज विहिंप का मूल वाक्य है कि हम अपने पूर्वजों को पहचाने और ऐसे धार्मिक योद्धाओं के गोत्रों की पहचान होनी चाहिए।

अध्यक्षता कर रहे बृजमोहन शीला ने कहा आज आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर भी कहीं-कहीं जाति और अस्पृश्यता की बातें आती हैं। लेकिन विश्व हिन्दू परिषद ने जो समरसता पर कार्य किए हैं उससे यह कहा जा सकता है कि बहुत जल्दी धर्मांतरण और अस्पृश्यता समाप्त हो जायेगा। विहिंपद हिन्दू समाज में जागरण का कार्य 1964 से आज तक कर रहा है। राम जन्मभूमि आंदोलन के समय भी वहां की पहली ईट अनुसूचित समाज के कामेश्वर चौपाल से रखवा कर यह साबित कर दिया था कि जाति जैसा कुछ नहीं है। विश्व हिन्दू परिषद पूरे दुनिया में हिन्दू धर्म एवं संस्कृति का प्रचार प्रसार कर रहा है। ऐसे अनेक कार्यक्रम संगठन द्वारा किए जा रहे हैं जिसका परिणाम है कि आज देश के सर्वोच्च पद पर अनुसूचित जनजाति की महिला विराजमान है। विहिप समाज के ऐसे वंचित लोगों के बीच आज सेवा शिक्षा चिकित्सा का कार्य कर रहा है और वहां से निकलने वाली पीढ़ी देश के सर्वोच्च पदों पर विराजमान हो रही हैं।

इस अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय सह मंत्री अंबरीश सिंह, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री पूर्वी उत्तर प्रदेश गजेंद्र, प्रांत अध्यक्ष कवींद्र प्रताप सिंह, प्रांत संगठन मंत्री मुकेश कुमार, प्रांत सह संगठन मंत्री नितिन, श्याम चंद्र हेला, हरि किशन बाल्मीकि, सुरेश सुदर्शन, राजेश सोनकर, सावन जोगी, अर्जुन कनौजिया, सुरेश भारतीय, छाया देवी, आशा देवी, अशोक प्रजापति, रविंद्र मोहन गोयल आदि उपस्थित रहे।