31HREG308 मानासखंड झांकी प्रथम स्थान पाने पर पुरस्कृत
देहरादून, 31 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रंगशाला शिविर में उत्तराखंड की “मानसखण्ड” झांकी को गणतंत्र दिवस पर विभिन्न राज्यों की झांकियों में प्रथम स्थान पाने पर पुरस्कृत किया गया है। यह पहला अवसर है जब उत्तराखंड की झांकी को प्रथम पुरस्कार के लिए चुना गया है।
उत्तराखंड सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग के महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने राज्य की ओर से पुरस्कार प्राप्त किया। इस मौके पर संयुक्त निदेशक केएस चौहान मौक़े पर मौजूद थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि देश विदेश के लोग मानसखंड के साथ ही उत्तराखंड की लोक संस्कृति से भी परिचित होंगे। मुख्यमंत्री ने झांकी को पुरस्कार के लिए चुने जाने पर प्रदेशवासियों, सूचना विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों और झांकी बनाने वाले कलाकारों और झांकी में सम्मिलित सभी कलाकारों को बधाई दी है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन के उपरान्त मानसखंड पर आधारित झांकी प्रस्तावित की गई थी। श्री केदारनाथ और श्री बदरीनाथ की तर्ज पर कुमाऊं के पौराणिक मंदिरों के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर मानसखंड मंदिर माला मिशन योजना पर काम किया जा रहा है, जिसमें इन प्रमुख मंदिरों का विकास होना है।
मुख्यमंत्री धामी के विजन के अनुसार पहले चरण में करीब 2 दर्जन से अधिक मंदिरों को इसमें शामिल किया गया है। इनमें जागेश्वर महादेव, चितई गोलज्यू मंदिर, सूर्यदेव मंदिर, नंदादेवी मंदिर कसारदेवी मंदिर, झांकर सैम मंदिर पाताल भुवनेश्वर, हाटकालिका मंदिर, मोस्टमाणु मंदिर, बेरीनाग मंदिर, मलेनाथ मंदिर, थालकेदार मंदिर, बागनाथ महादेव, बैजनाथ मंदिर, कोट भ्रामरी मंदिर, पाताल रुद्रेश्वर गुफा, गोल्ज्यू मंदिर, निकट गोरलचैड मैदान, पूर्णागिरी मंदिर, वारही देवी मंदिर देवीधुरा, रीठा मीठा साहिब, नैनादेवी मंदिर, गर्जियादेवी मंदिर, कैंचीधाम, चैती (बाल सुंदरी) मंदिर, अटरिया देवी मंदिर व नानकमत्ता साहिब प्रमुख रूप से शामिल किए गए हैं।
कर्तव्य पथ, नई दिल्ली गणतंत्र दिवस समारोह में उत्तराखंड राज्य की ओर से “मानसखंड” की झांकी प्रदर्शित की गई थी। 18 कलाकारों के दल ने भी झांकी में अपना प्रदर्शन किया। झांकी का थीम सांग “जय हो कुमाऊं, जय हो गढ़वाला” को पिथौरागढ़ के प्रसिद्ध जनकवि जनार्दन उप्रेती ने लिखा था तथा उसको सौरभ मैठाणी और साथियों ने सुर दिया था। इस थीम गीत के निर्माता पहाड़ी दगड़िया, देहरादून थे।